यूएई और इसराइल के बीच हालिया समझौते की घोषणा के बाद, पाकिस्तान में भी इसराइल के सवाल पर चर्चा शुरू हो गई है. अपनी सरकार की नीति के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बार-बार कहा है कि पाकिस्तान इसराइल को तब तक मान्यता नहीं दे सकता जब तक कि फ़लस्तीनियों की समस्या को न्यायिक रूप से हल नहीं किया जाता है. इसराइल को मान्यता देने का विचार पाकिस्तान में आता जाता रहा है. रक्षा मामलों की मशहूर विश्लेषक आयशा सिद्दीक़ा का कहना है कि, विभिन्न चरणों में पाकिस्तान के इसराइल के साथ अनौपचारिक संबंध रहे हैं. उनके अनुसार, “1970 के दशक में, पाकिस्तान ने ईरान के माध्यम से इसराइल से हथियार ख़रीदे थे. उस समय, ईरान के शाह पाकिस्तान के दूत की भूमिका निभा रहे थे. जनरल ज़िया-उल-हक़ के समय में भी ऐसा हुआ था. उस समय, पाकिस्तान के माध्यम से अमरीका और इसराइल से हथियार ख़रीद कर ईरान पहुंचाए गए थे. इस तरह के अनौपचारिक संबंध तो रहे हैं. लेकिन पारंपरिक कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के बारे में बात चीत पहली बार जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के दौर में हुई थी.”

स्टोरी: शकील अख़्तर
आवाज़: भरत शर्मा

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